May 27, 2024

Chherchhera 2024: छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण लोक त्यौहारों में से एक है। छेरछेरा किसानों, भोजन और अन्न दान का एक पारंपरिक त्यौहार है। यह त्यौहार पौष माह की पूर्णिमा के दिन नए धान से अन्न भंडार का कोठार के भर जाने की ख़ुशी में मनाया जाता है। इसे छेरछेरा पुन्नी, छेरछेरा तिहार या मां शाकंभरी जयंती भी कहा जाता है। दान लेने-देने के त्योहार के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती। हर साल इस दिन छत्तीसगढ़ के बच्चे और वयस्क घर-घर जाकर अन्न दान मांगते है और इकट्ठा करते हैं। युवाओं द्वारा डंडा नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। cherchera festival which state: यह छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार है।

नीचे हमने 2024 में छत्तीसगढ़ में छेरछेरा त्यौहार कब है, इसका महत्त्व और ऐतिहासिक मान्यता के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध है।

Cherchera tyohar kab manaya jata hai: छेरछेरा त्यौहार कब मनाया जाता है 

(Cherchera also pronounced Chherchhera) छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ में पौष पूर्णिमा, पौष मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि या छत्तीसगढ़ी बोली में पौष पुन्नी को मनाया जाता है। पौष माह की पूर्णिमा तक छत्तीसगढ़ के सभी किसान अपनी फसलें खेतों से काटकर अपने घरों में रख लेते थे। छेरछेरा त्यौहार किसानों और अन्न से जुड़ा है तथा धूम धाम से मनाया जाता है। 

Chherchhera kab hai 2024: छत्तीसगढ़ में छेरछेरा त्यौहार कब है 2024

cherchera date 2024: इस साल 2024 में छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व पौष माह की पूर्णिमा तिथि यानि 25 जनवरी, दिन गुरुवार को मनाया जायेगा। छेरछेरा त्यौहार हर साल पूर्णिमा के दिन होता है, जिसे दिन और रात दोनों समय शुभ माना जाता है। छेरछेरा त्यौहार छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, जिसमें सरकार भी भाग लेती है। इन त्योहारों के दौरान कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, साथ ही महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी की जाती हैं।

Cherchera 2024: ऐसे शुरू हुआ छेरछेरा त्यौहार: How Chherchhera festival started

Cherchera 2024: मुगल बादशाह जहांगीर की सल्तनत में रहते हुए कौशल क्षेत्र के राजा कल्याण साय ने राजनीति और युद्धकला सीखी। लगभग आठ वर्षों तक वे राज्य से बाहर रहे। राजा की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी रानी फुलकैना राज्य पर शासन करती थीं। युद्धकला की शिक्षा पूरी करने के बाद वे रतनपुर आ गए। उनके आने की खबर लोगों को पता चल गया तथा उनकी उपलब्धियों की खबर भी हर तरफ फ़ैल गयी। जिसकी खबर सुनते ही लोग राजा को बधाई और मिलने के लिए महल की ओर जाने लगे।

जैसे ही कौशल नरेश रतनपुर पहुंचे, छत्तीसगढ़ के सभी राजा उनके स्वागत के लिए आये। क्यूंकि 8 वर्ष बाद राजा अपने राज्य में लौट आया था। लोग उनकी वापसी को लेकर काफी उत्साहित थे. लोकगीतों और वाद्ययंत्रों के साथ हर कोई नाच रहा था। 

राजा की पत्नी  फुलकैना भी इतने लंबे समय के बाद अपने पति को दोबारा देखना उनके लिए बहुत खुशी की बात थी। सभी को सोने-चांदी के सिक्के देने का सिलसिला शुरू हो गया। राजा कल्याण साय ने उपस्थित राजाओं को निर्देश दिया कि आज के दिन को सदैव उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए; इसे सभी राज्यों में सूचित किया जाना चाहिए; उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस शुभ अवसर पर कोई भी किसी के घर से खाली हाथ न जाए।

शाकंभरी देवी से भी जुडी है दिलचस्प कहानी  

एक बार पृथ्वी पर भयंकर अकाल पड़ा – जिस वजह से भोजन, फल, फूल या औषधियाँ पैदा नहीं हो सकीं। परिणामस्वरूप, न केवल मनुष्य, बल्कि जानवर भी तड़पने लग गए । पूरे जगह में दहशत फैल गई।  भूख ने ऋषियों और आम लोगों दोनों को भयभीत कर दिया। तभी आदि देवी शक्ति शाकम्भरी प्रकट हुई।

जब देवी शाकम्भरी के प्रकट हुई तो देवी ने अपने भक्तो के लिए अन्न, भोजन, फल का भण्डारण ले आई। जिससे ऋषि-मुनियों सहित आम लोग अब भूखे या पीड़ित नहीं रहे । कहा जाता है कि इसी की याद में छेरछेरा मनाया जाता है. शाकम्भरी माता को सब्जियों और फलों को भी देवी के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि त्योहार के दिन हर मां के घर में देवी शाकंभरी होती हैं।

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छेरछेरा पर बोले जाने वाले कथन: माई कोठी के धान ला हेर हेरा

छेरछेरा एक ऐसा दिन है जब बच्चे सड़कों, गली-मोहल्लों और घरों में जाते हैं और दान (छेरछेरा) मांगते हैं। लोगों के घरो में जाकर बच्चे दान लेने के लिये जोर जोर से चिल्लाते हुए कहते हैं, ‘छेर छेरा माई कोठी के धान ला हेरेर हेरा’ और जब तक घर के लोग या गृहिणी अन्न दान नहीं करती या विलम्ब करती है, तब तक वे कहते रहते हैं, ‘अरन बरन कोदो डारन, जभे देबे तब्भे टरन” इसका मतलब यह होगा कि बच्चे कह रहे हैं, माँ, दान करो, जब तक तुम दान नहीं करोगी, तब तक हम यहाँ से नहीं जायेंगे।

छत्तीसगढ़ का लोकपर्व छेरछेरा महत्व: Why cherchera is celebrated

Why cherchera is celebrated: लोग हमेशा जानना चाहते है कि छेरछेरा त्यौहार Cherchera tyohar कैसे मनाया जाता है। हम बता दे कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक त्योहारों में छेरछेरा (2024) है। यह एक छत्तीसगढ़ लोक त्योहार है जो खेती, भोजन और दान से जुड़ा है। पौष माह की पूर्णिमा अन्न भंडार के ताजे धान से भरने का जश्न मनाती है। इस दिन पारंपरिक रूप से धान माँगा जाता  है।

छेरछेरा पर्व (Chherchhera 2024) में एक अच्छा संदेश छिपा है कि इससे अमीर-गरीब के बीच दूरियां कम होती हैं और आर्थिक विषमता दूर होती है। इस पर्व में अहंकार के त्याग की भावना है, जो हमारी परंपरा का हिस्सा है। इसका उद्देश्य इस लोक पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाकर छत्तीसगढ़ के गांवों और शहरों में सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।

इस दिन किसानों के परिवार भी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। घर-घर आवाजों से भरे रहते हैं… हरते हेरा, माई कोठी के धान ले हरते हेरा और हारा बरन कोदो डरन, जभे देबे तभे तरन…… इस दिन मोहल्ले बच्चों और युवाओं उत्साह से भरे रहते हैं। सुबह-सुबह वह दान मांगना शुरु कर देते है। भले ही यह गांव का त्योहार है लेकिन इसकी खूबसूरती शहरों में भी दिखाई देती है।

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