
छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थल: Religious sites of Chhattisgarh| आस्था और शांति का केंद्र
Religious sites of Chhattisgarh: छत्तीसगढ़, जिसे प्राचीन काल में ‘दक्षिण कोसल’ के नाम से जाना जाता था, न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह अटूट श्रद्धा और अध्यात्म की पावन धरा भी है। यहाँ की मिट्टी के कण-कण में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। महानदी के तट पर बसे प्राचीन मंदिरों से लेकर पहाड़ों की चोटियों पर विराजमान शक्तिपीठों तक, छत्तीसगढ़ के धार्मिक स्थल पर्यटकों और श्रद्धालुओं को एक अनूठा मानसिक सुकून प्रदान करते हैं। चाहे वह राजिम का ‘कुंभ’ हो या डोंगरगढ़ की ऊँची पहाड़ियों पर स्थित माँ बमलेश्वरी का दरबार, यहाँ की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मान्यताएँ देश-दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। आइए, इस लेख के माध्यम से हम छत्तीसगढ़ के उन चुनिंदा तीर्थों की यात्रा करते हैं, जो छत्तीसगढ़िया संस्कृति की पहचान हैं।
सिरपुर – लक्ष्मण मंदिर एवं प्राचीन पुरावशेष

महानदी के तट पर स्थित सिरपुर छत्तीसगढ़ का प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल है। प्राचीन काल में यह दक्षिण कोसल की राजधानी हुआ करता था। सिरपुर का प्राचीन नाम श्रीपुर या चित्रांगदपुर माना जाता है।
यह स्थान विशेष रूप से 7वीं शताब्दी में निर्मित लक्ष्मण मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। लाल ईंटों से बना यह मंदिर नागर शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है। मंदिर का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता रानी वासटा देवी ने करवाया था। गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है।
सिरपुर बौद्ध धर्म का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्वास्तिक बौद्ध विहार, आनंदप्रभु कुटीर विहार और अनेक प्राचीन बुद्ध प्रतिमाएं मिली हैं। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी 639 ईस्वी में सिरपुर की यात्रा की थी।
सिरपुर के प्रमुख आकर्षण
- लक्ष्मण मंदिर
- स्वास्तिक बौद्ध विहार
- आनंदप्रभु कुटीर विहार
- गंधेश्वर महादेव मंदिर
- प्राचीन पुरातात्विक अवशेष

घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय सिरपुर घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
आनंदप्रभु कुटीर विहार – सिरपुर

आनंदप्रभु कुटीर विहार छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं बौद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यह सिरपुर में स्थित प्राचीन बौद्ध विहार है, जिसका निर्माण 7वीं शताब्दी में बौद्ध भिक्षु आनंदप्रभु द्वारा कराया गया था।
यह विहार सिरपुर की समृद्ध बौद्ध संस्कृति और शिक्षा परंपरा का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। खुदाई के दौरान यहां अनेक प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख और धार्मिक अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इतिहासकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
आनंदप्रभु कुटीर विहार अपनी सुंदर स्थापत्य कला और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। बौद्ध धर्म में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन बौद्ध विहार
- ऐतिहासिक शिलालेख
- बौद्ध मूर्तियां एवं अवशेष
- शांत प्राकृतिक वातावरण
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
गंधेश्वर महादेव मंदिर – सिरपुर

गंधेश्वर महादेव मंदिर सिरपुर का प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक मंदिर है, जो महानदी के तट पर स्थित है। यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता है।
मंदिर में विभिन्न कालखंडों की देवी-देवताओं की मूर्तियां और प्राचीन शिल्प अवशेष देखने को मिलते हैं। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण प्राचीन मंदिरों के अवशेषों से किया गया था। मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ-साथ विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म से संबंधित प्रतिमाएं भी मौजूद हैं, जो सिरपुर की धार्मिक समन्वय परंपरा को दर्शाती हैं।
महानदी के किनारे स्थित होने के कारण यहां का प्राकृतिक वातावरण बेहद शांत और आकर्षक दिखाई देता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह स्थल इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भी खास महत्व रखता है।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन शिवलिंग
- महानदी तट का सुंदर दृश्य
- पुरातात्विक मूर्तियां और शिल्प
- ऐतिहासिक मंदिर वास्तुकला
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय मंदिर भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
खल्लारी – नारायण मंदिर एवं खल्लारी माता मंदिर

खल्लारी छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और पौराणिक पर्यटन स्थल है, जो महासमुंद जिले में स्थित है। प्राचीन काल में इस स्थान को “खल्लवाटिका” के नाम से जाना जाता था। यह स्थल अपनी ऐतिहासिक मान्यताओं, पहाड़ी मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
खल्लारी का प्रसिद्ध नारायण मंदिर कलचुरी शासनकाल में बनाया गया था। मान्यता है कि देवपाल नामक एक मोची ने अपनी जीवन भर की कमाई से इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यह मंदिर धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।
यहां दो प्रमुख खल्लारी माता मंदिर स्थित हैं। पहाड़ी के नीचे बड़ी खल्लारी माता और पहाड़ी के ऊपर छोटी खल्लारी माता विराजमान हैं। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल से जुड़ी भीम चूल डोंगा और भीम के पदचिह्न यहां मौजूद हैं। स्थानीय लोककथाओं में इस स्थान को लक्षागृह घटना से भी जोड़ा जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- नारायण मंदिर
- खल्लारी माता मंदिर
- भीम पदचिह्न
- प्राकृतिक पहाड़ी दृश्य
घूमने का सबसे अच्छा समय
नवरात्रि और सर्दियों का मौसम यहां यात्रा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
तुरतुरिया – महर्षि वाल्मीकि आश्रम एवं लव-कुश जन्मस्थली

तुरतुरिया छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जो बलौदाबाजार जिले के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान माता सीता ने इसी स्थान पर निवास किया था और यहीं लव-कुश का जन्म हुआ था।
यह स्थान महर्षि वाल्मीकि के आश्रम के रूप में प्रसिद्ध है। यहां चट्टानों की दरारों से निरंतर जलधारा बहती रहती है, जिससे “तुर-तुर” जैसी ध्वनि निकलती है। इसी कारण इस स्थान का नाम तुरतुरिया पड़ा।
पुरातात्विक खुदाई में यहां बौद्ध कालीन मूर्तियां और प्राचीन अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जो इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। यहां स्थित माता गढ़ और पहाड़ी पर बनी सेर गुफा श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
नवरात्रि और धार्मिक मेलों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण यह स्थल छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

प्रमुख आकर्षण
- महर्षि वाल्मीकि आश्रम
- लव-कुश जन्मस्थली
- प्राकृतिक जलधारा
- सेर गुफा और माता गढ़
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी और नवरात्रि का समय यहां भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
राजीव लोचन मंदिर – छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम

राजिम छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक नगर है, जिसे “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहा जाता है। यह स्थान महानदी, पैरी और सोंढूर नदी के संगम पर स्थित है। प्राचीन काल में राजिम को “कमल क्षेत्र” के नाम से जाना जाता था।
राजिम का सबसे प्रसिद्ध मंदिर राजीव लोचन मंदिर है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस प्राचीन मंदिर का निर्माण लगभग 5वीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर की सुंदर नक्काशी और पत्थरों पर बनी कलाकृतियां इसकी स्थापत्य कला को विशेष बनाती हैं।
राजिम में कुलेश्वर महादेव मंदिर, राजेश्वर मंदिर, दानेश्वर मंदिर और प्राचीन जगन्नाथ मंदिर भी स्थित हैं। मान्यता है कि भगवान राम ने वनवास काल में यहां कुलेश्वर महादेव की पूजा की थी।
हर वर्ष यहां राजिम कुंभ मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। धार्मिक आस्था, संगम तट और प्राचीन मंदिरों के कारण राजिम छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- राजीव लोचन मंदिर
- त्रिवेणी संगम
- कुलेश्वर महादेव मंदिर
- राजिम कुंभ मेला

घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च और राजिम कुंभ के दौरान यहां घूमना सबसे अच्छा माना जाता है।
मंदिरों की नगरी आरंग – भांड देवल मंदिर

आरंग छत्तीसगढ़ की सबसे प्राचीन ऐतिहासिक नगरियों में से एक है। रायपुर जिले में स्थित यह नगर अपने प्राचीन मंदिरों, धार्मिक महत्व और पुरातात्विक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि महाभारत काल में यह राजा मोरध्वज की नगरी थी।
आरंग को “मंदिरों की नगरी” कहा जाता है क्योंकि यहां अनेक प्राचीन मंदिर और मूर्तियां आज भी मौजूद हैं। यहां का सबसे प्रसिद्ध भांड देवल मंदिर जैन धर्म से संबंधित है। इस मंदिर की स्थापत्य कला और पत्थरों पर की गई नक्काशी पर्यटकों को आकर्षित करती है।
आरंग में बागेश्वर मंदिर, पंचमुखी महादेव मंदिर, महामाया मंदिर और हरदेवलाल बाबा मंदिर भी प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। कई प्राचीन मंदिर वर्तमान में भग्न अवस्था में हैं, जो इस नगर की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं।
धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व के कारण आरंग छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- भांड देवल जैन मंदिर
- बागेश्वर मंदिर
- पंचमुखी महादेव मंदिर
- प्राचीन मूर्तियां और अवशेष
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय आरंग भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
चम्पारण – महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली

चम्पारण छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन स्थल है, जो रायपुर जिले में स्थित है। यह स्थान वैष्णव संप्रदाय के प्रवर्तक और महान संत महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार महाप्रभु वल्लभाचार्य का जन्म यहीं हुआ था। इसी कारण देशभर से श्रद्धालु और वैष्णव भक्त यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। चम्पारण को पुष्टिमार्ग का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है।
यहां स्थित चम्पेश्वर नाथ महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मंदिर परिसर का शांत वातावरण और धार्मिक महत्व पर्यटकों को आकर्षित करता है।
चम्पारण में हर वर्ष धार्मिक उत्सव और मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्व के कारण यह छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- महाप्रभु वल्लभाचार्य जन्मस्थली
- चम्पेश्वर नाथ महादेव मंदिर
- वैष्णव तीर्थ स्थल
- धार्मिक उत्सव और मेले
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च तक का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
माता शबरी मंदिर – शिवरीनारायण

शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और पौराणिक पर्यटन स्थल है, जो जांजगीर-चांपा जिले में स्थित है। यह स्थान भगवान राम और माता शबरी से जुड़ी पौराणिक कथाओं के कारण विशेष महत्व रखता है।
मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम ने यहीं माता शबरी के प्रेम से अर्पित जूठे बेर ग्रहण किए थे। इसी कारण यह स्थान रामायण कालीन आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
शिवरीनारायण में शबरी नारायण मंदिर, केशव नारायण मंदिर और चंद्रचूड़ महादेव मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। यहां की प्राचीन मंदिर वास्तुकला और धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
हर वर्ष माघ पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

प्रमुख आकर्षण
- माता शबरी मंदिर
- केशव नारायण मंदिर
- चंद्रचूड़ महादेव मंदिर
- माघ पूर्णिमा मेला
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च और माघ पूर्णिमा के दौरान यहां भ्रमण सबसे अच्छा माना जाता है।
रामगढ़ की गुफाएं

रामगढ़ की गुफाएं छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जो सरगुजा जिले के अंबिकापुर क्षेत्र के पास स्थित है। घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा यह स्थान अपनी प्राचीन गुफाओं, शैलचित्रों और पौराणिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है।
मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने कुछ समय यहां बिताया था। इसी कारण इस स्थान का नाम रामगढ़ पड़ा।
यहां स्थित सीता बंगरा गुफा, जोगीमारा गुफा और लक्ष्मण बंगरा गुफा प्रमुख आकर्षण हैं। जोगीमारा गुफा को भारत की प्राचीन नाट्यशाला माना जाता है। गुफाओं की दीवारों पर बने प्राचीन चित्र और शिलालेख इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक मान्यताओं के कारण रामगढ़ की गुफाएं छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हैं।

प्रमुख आकर्षण
- सीता बंगरा गुफा
- जोगीमारा गुफा
- प्राचीन शैलचित्र
- प्राकृतिक पहाड़ी दृश्य
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
पुजारीपाली
पुजारीपाली छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो रायगढ़ जिले के सरिया क्षेत्र के निकट स्थित है। यह स्थान प्राचीन मंदिरों, शिलालेखों और पुरातात्विक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।
पुजारीपाली में जैन और हिंदू धर्म से संबंधित अनेक प्राचीन मूर्तियां प्राप्त हुई हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। यहां स्थित प्राचीन मंदिर के अवशेषों को स्थानीय लोग “केवटिन मंदिर” के नाम से जानते हैं।
मंदिर परिसर में मिले शिलालेख इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन शिलालेखों की लिपि नागरी शैली की है, जो प्राचीन कालीन स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं की जानकारी देती है।
धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण पुजारीपाली इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
प्रमुख आकर्षण
- केवटिन मंदिर अवशेष
- प्राचीन शिलालेख
- जैन एवं हिंदू मूर्तियां
- ऐतिहासिक पुरावशेष
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
गिरौधपुरी – संत गुरु घासीदास बाबा की जन्मस्थली

गिरौधपुरी छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक तीर्थ स्थल है, जो बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित है। यह स्थान सतनामी समाज के महान संत गुरु घासीदास बाबा की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि गुरु घासीदास बाबा को इसी स्थान के छाता पहाड़ पर सत्य और ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उनके द्वारा दिए गए सत्य, अहिंसा और समानता के संदेश ने समाज में नई जागरूकता पैदा की।
गिरौधपुरी में बना विशाल जैतखाम श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। यह दुनिया के सबसे ऊंचे जैतखामों में से एक माना जाता है। हर वर्ष 18 दिसंबर को यहां विशाल मेले और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
धार्मिक महत्व, सामाजिक चेतना और प्राकृतिक वातावरण के कारण गिरौधपुरी छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- गुरु घासीदास बाबा जन्मस्थली
- विशाल जैतखाम
- छाता पहाड़
- धार्मिक मेला और सतनाम पंथ स्थल
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी और 18 दिसंबर के दौरान यहां यात्रा सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
कबरा पहाड़ – रायगढ़

कबरा पहाड़ छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है, जो रायगढ़ जिले में स्थित है। यह स्थान अपने प्राचीन शैलचित्रों और प्राकृतिक पहाड़ी संरचनाओं के लिए जाना जाता है। रायगढ़ नगर से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल इतिहास और पुरातत्व में विशेष महत्व रखता है।
कबरा पहाड़ की गुफाओं और शैलाश्रयों में प्राचीन मानव जीवन से जुड़े चित्र देखने को मिलते हैं। यहां सूर्य आकृति, विशाल जंगली सूअर, छिपकली जैसे जीवों और अन्य वन्य आकृतियों के शैलचित्र बने हुए हैं। ये चित्र प्रागैतिहासिक काल की कला और संस्कृति को दर्शाते हैं।
प्राकृतिक वातावरण और पहाड़ी दृश्य इस स्थान को पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक बनाते हैं। इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल माना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन शैलचित्र
- प्राकृतिक गुफाएं
- पहाड़ी और वन क्षेत्र
- पुरातात्विक अवशेष
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
भोरमदेव मंदिर – कवर्धा का खजुराहो

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल है। अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और सुंदर मूर्तिकला के कारण इसे “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है।
यह प्राचीन शिव मंदिर 11वीं शताब्दी में नागवंशी शासकों के काल में बनाया गया था। मंदिर का निर्माण राजा गोपाल देव द्वारा करवाया गया माना जाता है। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, नृत्य करती मूर्तियों, हाथी, घोड़े और मिथुन प्रतिमाओं की आकर्षक नक्काशी देखने को मिलती है। इसकी स्थापत्य शैली पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन शिव मंदिर
- उत्कृष्ट पत्थर नक्काशी
- प्राकृतिक पहाड़ी वातावरण
- भोरमदेव महोत्सव
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
दामाखेड़ा – कबीर पंथियों का प्रमुख तीर्थ स्थल

दामाखेड़ा छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो कबीर पंथियों की प्रमुख आस्था का केंद्र माना जाता है। यह स्थल बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित है और कबीर पंथ के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है।
दामाखेड़ा में कबीर पंथ के गुरु गद्दी स्थल स्थित हैं, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन और सत्संग के लिए पहुंचते हैं। यहां का शांत वातावरण और आध्यात्मिक माहौल भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
हर वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णिमा तक यहां विशाल “संत समागम मेला” आयोजित किया जाता है। इस मेले में हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं और संत कबीर के उपदेशों का श्रवण करते हैं।
धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक परंपरा के कारण दामाखेड़ा छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है।

प्रमुख आकर्षण
- कबीर पंथ गुरु गद्दी
- संत समागम मेला
- सत्संग एवं धार्मिक कार्यक्रम
- शांत आध्यात्मिक वातावरण
घूमने का सबसे अच्छा समय
माघ मेले के दौरान और अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
रतनपुर – तालाबों की नगरी

रतनपुर छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक नगर है, जिसे “तालाबों की नगरी” के नाम से जाना जाता है। यह नगर बिलासपुर जिले में स्थित है और प्राचीन काल में कलचुरी राजाओं की राजधानी हुआ करता था।
रतनपुर की स्थापना कलचुरी शासक रत्नदेव प्रथम ने की थी। यहां स्थित महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
रतनपुर में कंठी देवल मंदिर, भुवनेश्वर महादेव मंदिर, भैरव बाबा मंदिर और राम टेकरी मंदिर भी प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। राम टेकरी मंदिर का निर्माण मराठा शासनकाल में कराया गया था।
प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक तालाबों और धार्मिक वातावरण के कारण रतनपुर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।

प्रमुख आकर्षण
- महामाया मंदिर
- कंठी देवल मंदिर
- राम टेकरी मंदिर
- प्राचीन तालाब और किले अवशेष
घूमने का सबसे अच्छा समय
नवरात्रि और अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
मल्हार – छत्तीसगढ़ की प्राचीन ऐतिहासिक नगरी

मल्हार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है। यह प्राचीन नगरी अपनी दुर्लभ मूर्तियों, मंदिर अवशेषों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जानी जाती है।
इतिहासकारों के अनुसार मल्हार प्राचीन काल में एक समृद्ध नगर था। यहां खुदाई के दौरान जैन, बौद्ध और हिंदू धर्म से संबंधित अनेक मूर्तियां और अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह स्थल छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति और कला का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
मल्हार का सबसे प्रसिद्ध पातालेश्वर मंदिर है, जो अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। यहां स्थित डिडनेश्वरी देवी मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मंदिरों में काले ग्रेनाइट पत्थरों पर की गई सुंदर नक्काशी देखने लायक है।
धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण मल्हार छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
प्रमुख आकर्षण
- पातालेश्वर मंदिर
- डिडनेश्वरी देवी मंदिर
- प्राचीन मूर्तियां और अवशेष
- पुरातात्विक खुदाई स्थल
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
खरौद – छत्तीसगढ़ का काशी

खरौद छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जिसे “छत्तीसगढ़ का काशी” कहा जाता है। यह नगर जांजगीर-चांपा जिले में स्थित है और अपने प्राचीन मंदिरों तथा धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।
खरौद का सबसे प्रसिद्ध लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और विशाल शिवलिंग के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग स्वयंभू है और इसकी पूजा से विशेष फल प्राप्त होता है।
यहां इंदल देवल मंदिर और शबरी मंदिर भी प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। प्राचीन तालाबों, आम्र वृक्षों और शांत वातावरण के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत के कारण खरौद छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
प्रमुख आकर्षण
- लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर
- इंदल देवल मंदिर
- प्राचीन तालाब
- धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भ्रमण सबसे अच्छा माना जाता है।
अड़भार – अष्टभुजी देवी महिषासुर मर्दिनी मंदिर

अड़भार छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान अपने प्राचीन मंदिरों, तालाबों और पुरातात्विक अवशेषों के लिए जाना जाता है। प्राचीन काल में अड़भार का नाम “अष्टद्वार” माना जाता था।
यहां स्थित अष्टभुजी देवी महिषासुर मर्दिनी मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मंदिर में देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा और मेले का आयोजन किया जाता है।
अड़भार में बौद्ध और जैन धर्म से संबंधित अनेक प्राचीन मूर्तियां भी प्राप्त हुई हैं। मंदिर परिसर के सामने देगन गुरु नाम से प्रसिद्ध तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थित है। इसके अलावा चंद्रहासिनी मंदिर और नाथल दाई मंदिर भी प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।
धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत के कारण अड़भार छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
प्रमुख आकर्षण
- अष्टभुजी देवी मंदिर
- पार्श्वनाथ प्रतिमा
- चंद्रहासिनी मंदिर
- प्राचीन तालाब और अवशेष
घूमने का सबसे अच्छा समय
नवरात्रि और अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
पाली – प्राचीन शिव मंदिर, कोरबा

पाली छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। यह स्थान अपने प्राचीन शिव मंदिर और कलात्मक स्थापत्य के लिए जाना जाता है। पाली गांव के आसपास अनेक प्राचीन मंदिरों और अवशेषों के प्रमाण मिलते हैं, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाते हैं।
पाली का प्रसिद्ध शिव मंदिर प्राचीन कालीन स्थापत्य कला का सुंदर उदाहरण माना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण बाणवंशी शासकों के समय हुआ था, जिसका बाद में कलचुरी शासक जाजल्ल देव द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया।
मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं, नृत्य करती आकृतियों और विभिन्न कलात्मक मूर्तियों की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर के पास स्थित विशाल तालाब इस स्थल की सुंदरता को और बढ़ाता है।
धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व के कारण पाली छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन शिव मंदिर
- कलात्मक पत्थर नक्काशी
- विशाल तालाब
- ऐतिहासिक मंदिर अवशेष
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
नगपुरा – प्रसिद्ध जैन मंदिर

नगपुरा छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जो दुर्ग जिले के पास स्थित है। यह स्थान विशेष रूप से अपने भव्य जैन मंदिर और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है।
नगपुरा में स्थित जैन मंदिर जैन समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां 24 तीर्थंकरों की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। मंदिर की आकर्षक वास्तुकला, शांत वातावरण और सुंदर परिसर इसे खास बनाते हैं।
यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण भी लोकप्रिय पर्यटन स्थल माना जाता है।
नगपुरा में अन्य प्राचीन मंदिर और दर्शनीय स्थल भी स्थित हैं, जो इसकी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
प्रमुख आकर्षण
- भव्य जैन मंदिर
- 24 तीर्थंकर प्रतिमाएं
- शांत धार्मिक वातावरण
- सुंदर मंदिर परिसर
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
लाफागढ़ – प्राचीन किला और प्राकृतिक पर्यटन स्थल

लाफागढ़ छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जो कोरबा जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित है। यह स्थान अपने प्राचीन किले, मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
लाफागढ़ की पहाड़ी पर स्थित चतुरगढ़ किला यहां का प्रमुख आकर्षण है। किले के प्राचीन द्वार, मंदिर अवशेष और पत्थरों पर बनी कलात्मक मूर्तियां इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती हैं। यहां महिषासुर मर्दिनी देवी की प्राचीन प्रतिमा श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र मानी जाती है।
लाफागढ़ का प्राकृतिक वातावरण, घने जंगल और पहाड़ी दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां की प्राकृतिक गुफाएं और ऐतिहासिक अवशेष इतिहास प्रेमियों और ट्रैकिंग पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।
धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के कारण लाफागढ़ छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
प्रमुख आकर्षण
- चतुरगढ़ किला
- महिषासुर मर्दिनी मंदिर
- प्राकृतिक गुफाएं
- पहाड़ी और वन क्षेत्र
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
माँ दंतेश्वरी मंदिर – दंतेवाड़ा

माँ दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ और धार्मिक पर्यटन स्थल है। यह मंदिर बस्तर क्षेत्र की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी को समर्पित है और पूरे छत्तीसगढ़ में विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
इतिहास के अनुसार बस्तर में लंबे समय तक नागवंशी शासकों का शासन रहा। उन्होंने अपनी कुलदेवी के रूप में माँ दंतेश्वरी की स्थापना की थी। यह प्राचीन मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।
मंदिर की सुंदर वास्तुकला, विशाल परिसर और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। बस्तर दशहरा के दौरान यहां विशेष पूजा और भव्य आयोजन किए जाते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
दंतेवाड़ा के आसपास चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात और बारसूर जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी स्थित हैं। धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह स्थान छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।
प्रमुख आकर्षण
- माँ दंतेश्वरी मंदिर
- बस्तर दशहरा
- शंखिनी-डंकिनी नदी संगम
- आसपास के जलप्रपात और पर्यटन स्थल
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी और बस्तर दशहरा के दौरान यहां भ्रमण सबसे अच्छा माना जाता है।
बारसूर – बत्तीसा मंदिर और प्राचीन मंदिर समूह

बारसूर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल है, जो दंतेवाड़ा जिले में स्थित है। यह स्थान अपने प्राचीन मंदिरों, विशाल मूर्तियों और अद्भुत स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार बारसूर कभी नागवंशी शासकों की राजधानी हुआ करता था। यहां 11वीं और 12वीं शताब्दी के अनेक प्राचीन मंदिर आज भी मौजूद हैं।
बारसूर का प्रसिद्ध बत्तीसा मंदिर 32 विशाल पत्थर के स्तंभों पर टिका हुआ है, जिसके कारण इसे बत्तीसा मंदिर कहा जाता है। यहां स्थित मामा-भांजा मंदिर अपनी अनोखी स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। चंद्रादित्य मंदिर और जुड़वा विशाल गणेश प्रतिमाएं भी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं।
प्राचीन मंदिरों, शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के कारण बारसूर बस्तर क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता है।

प्रमुख आकर्षण
- बत्तीसा मंदिर
- मामा-भांजा मंदिर
- चंद्रादित्य मंदिर
- जुड़वा गणेश प्रतिमा
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय यहां भ्रमण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
गरियाबंद – जतमई, घटारानी और भूतेश्वर महादेव

गरियाबंद छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जो अपने सुंदर जलप्रपातों, पहाड़ी मंदिरों और प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां स्थित जतमई माता मंदिर, घटारानी जलप्रपात और भूतेश्वर महादेव श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
जतमई माता मंदिर घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के आसपास बहता जलप्रपात और प्राकृतिक दृश्य इस स्थान की सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
घटारानी जलप्रपात गरियाबंद का लोकप्रिय पिकनिक और पर्यटन स्थल है। बारिश के मौसम में यहां का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। पहाड़ियों से गिरता जल और हरियाली पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
भूतेश्वर महादेव प्राकृतिक शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माना जाता है। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता के कारण गरियाबंद छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है।

प्रमुख आकर्षण
- जतमई माता मंदिर
- घटारानी जलप्रपात
- भूतेश्वर महादेव
- प्राकृतिक पहाड़ी और वन क्षेत्र
घूमने का सबसे अच्छा समय
जुलाई से फरवरी तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी और धार्मिक पर्यटन केंद्र
रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगर भी है। प्राचीन काल में यहां पांडुवंशी शासकों का प्रभाव रहा और यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

रायपुर में अनेक प्रसिद्ध मंदिर और धार्मिक स्थल स्थित हैं, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। दुधाधारी मठ, महामाया मंदिर, शीतला माता मंदिर, बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर और प्राचीन राम मंदिर यहां के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
महादेव घाट और बंजारी धाम भी रायपुर के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। महादेव घाट महानदी के किनारे स्थित है, जहां धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
धार्मिक स्थलों के साथ-साथ रायपुर आधुनिक शहर, स्थानीय बाजार, संग्रहालय और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
प्रमुख आकर्षण
- दुधाधारी मठ
- महामाया मंदिर
- महादेव घाट
- बंजारी धाम
- प्राचीन राम मंदिर
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से फरवरी तक का समय रायपुर घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
FAQ
छत्तीसगढ़ का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कौन सा है?
माँ दंतेश्वरी मंदिर, राजिम और सिरपुर छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माने जाते हैं।
छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक पर्यटन स्थल कौन-कौन से हैं?
सिरपुर, मल्हार, रतनपुर, रामगढ़ गुफाएं और भोरमदेव प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हैं।
छत्तीसगढ़ घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से फरवरी का समय पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
