Monday, November 28, 2022
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    छत्तीसगढ़ से है श्रीराम का गहरा नाता, वनवास के 12 साल यही बितायें

    Ram van gaman path route project chhattisgarh: रामायण हिन्दू रघुवंश के राजा राम  की गाथा है। । यह आदि कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य, स्मृति का वह अंग है। इसे आदिकाव्य तथा इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ भी कहा जाता है। रामायण के छः अध्याय हैं जो काण्ड  के नाम से जाने जाते हैं, इसके 24000 श्लोक हैं

    छत्तीसगढ़ का रामायण कालीन इतिहास

    भगवान श्रीराम को लेकर छत्तीसगढ़ में ऐसी मान्यता है कि उन्होंने 14 वर्ष के वनवास काल में से 10 वर्ष दण्डकारण्य में व्यतीत किए. रामायण कथा के कई लेखों में भगवान श्रीराम के छत्तीसगढ़ (दक्षिण कोसल) में प्रवास के वृतांत हैं. रामायण से संबंधित कई शोधकर्ताओं ने आज के छत्तीसगढ़ राज्य में श्रीराम के इस पथ को चिन्हित करने का प्रयास किया है.

    छत्तीसगढ़ का इतिहास जितना प्राचीन है उतना ही प्रशस्त है त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम दक्षिण कौसल एवं दण्डकारण्य के रूप में विख्यात था दण्डकारण्य में भगवान श्रीराम के वनगमन यात्रा की पुष्टि वाल्मीकि रामायण से होती है शोधकर्ताओं के शोध किताबों से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से लगभग 10 वर्ष से अधिक समय छत्तीसगढ़ में व्यतीत किया था

    प्रभु श्रीराम ने उत्तर भारत से छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने के बाद छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों पर चौमासा व्यतीत करने के बाद दक्षिण भारत में प्रवेश किया गया था. इसलिए छत्तीसगढ़ को दक्षिणापथ भी कहा जाता है छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के भरतपुर तहसील में मवाई नदी से होकर जनकपुर नामक स्थान से लगभग 28 किमी की दूरी पर स्थित सीतामढ़ी-हरचौका नामक स्थान से प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया

    इस राम वनगमन पथ के विषय पर शोध का कार्य राज्य में स्थित संस्थान ‘छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान रायपुर के द्वारा किया गया है इसमें मन्नू लाल यदु ने ‘दण्डकारण्य रामायण किताब का प्रकाशन किया है और इसी विषय पर उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ पर्यटन में राम वनगमन पथ के नाम से पुस्तक का प्रकाशन किया है इन किताबों के अनुसार प्रभु श्रीराम के द्वारा छत्तीसगढ़ में वनवास के 10 वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान विभिन्न स्थलों का प्रवास किया गया

    शोध प्रकाशनों के अनुसार प्रभु श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान लगभग 75 स्थलों का भ्रमण किया जिसमें से 51 स्थल ऐसे हैं जहां प्रभु राम ने भ्रमण के दौरान रूककर कुछ समय व्यतीत किया था शोधकर्ताओं ने अपने शोध के आधार पर प्रभु श्रीराम के इन स्थलों में भ्रमण किए जाने की पुष्टि की है छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इन राम वनगमन पथ का पर्यटन की दृष्टि से विकास की योजना पर कार्य किया जा रहा है इनके विकास का उद्देश्य राज्य में आने वाले पर्यटकों आगंतुकों के साथ साथ राज्य के लोगों को भी इन राम वनगमन मार्ग एवं स्थलों से परिचित कराना है 

    छत्तीसगढ़ में राम वनगमन पथ

    रामायण के मुताबिक भगवान राम ने वनवास का वक्त दंडकारण्य में बिताया। छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा ही प्राचीन समय का दंडकारण्य माना जाता है। अब उन जगहों को नई सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है जिन्हें लेकर यह दावा किया जाता है कि वनवास के वक्त भगवान यहीं रहे।

    कोरिया जिले से सुकमा तक बन रहे राम वन गमन पथ में लोगों को कदम कदम पर भगवान श्रीराम के दर्शन होंगे। राम वन गमन पथ के कुल लम्बाई लगभग 2260 किलोमीटर है। इन रास्तों पर किनारे जगह जगह साइन बोर्ड श्रीराम के वनवास से जुड़ी कथाएं देखने और सुनने को मिलेंगी। इन रास्तों पर कई तरह के पेड़ लगाए जा रहे हैं। ये पेड़ वैसा ही महसूस कराएंगे जैसा भगवान राम के वन वास के वक्त को लेकर यादें लोगों के जेहन में हैं।

    राम के वनवास काल से संबंधित 75 स्थानों को चिन्हित कर उन्हें नये पर्यटन सर्किट के रुप में आपस में जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में उत्तर छत्तीसगढ़ में स्थित कोरिया जिले से लेकर दक्षिण के सुकमा जिले तक 9 स्थानों का सौंदर्यीकरण तथा विकास किया जा रहा है। ये सभी स्थान पहले ही प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर हैं। वृक्षारोपण के जरिए अब इन्हें और भी हरा-भरा किया जा रहा है। सभी चयनित पर्यटन-तीर्थों पर सुगंधित फूलों वाली सुंदर वाटिकाएं भी तैयार की जाएंगी। राम वन गमन के 528 किलोमीटर मार्ग के दोनों किनारों पर डेढ़ लाख से अधिक पौधे का रोपण वन विभाग द्वारा चालू वर्ष के दौरान किया गया है। इस पूरे मार्ग पर पीपल बरगद आम हर्रा बेहड़ा जामुन अर्जुन खम्हार आंवला शिशु करंज नीम आदि के पौधों का रोपण शामिल हैं। राम वन गमन पथ के माध्यम से दुनियाभर के सामने जैव विविधता का दर्शन भी होगा।

    शुरुआत रायपुर के पास चंदखुरी के माता कौशल्या मंदिर से हो चुकी है। लगभग 1400 किलोमीटर सड़कों के दोनों ओर वृक्षारोपण है। राम वन गमन पथ पर पहले चरण में 9 स्थानों का चयन किया गया है। सभी जगहों पर लैंड स्केपिंग प्री-कास्ट और फेब्रीकेशन वर्क गेट पर भगवान राम का धनुष तीर होगा। राम के झंडे लगेंगे प्राचीन लुक के लैंपोस्ट होंगे

    छत्तीसगढ़ के उन स्थानों के बारे में जो भगवान राम से संबंधित हैं-

    राम वन गमन पथ(Places of chhattisgarh which are related to lord ram) के प्रथम चरण के लिए नौ स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें सीतामढ़ी हरचौका कोरिया रामगढ़ अंबिकापुर शिवरी नारायण जांजगीर-चांपा तुरतुरिया बलौदाबाजार चंदखुरी रायपुर राजिम गरियाबंद सिहावा-साऋषि आश्रम धमतरी जगदलपुर बस्तर और रामाराम सुकमा शामिल हैं। इसमें से चंद्रपुरी रायपुर में कार्य शुरू हो चुका है जहां लगभग 30 प्रतिशत से ज्यादा कार्य पूर्ण हो चुके हैं। वहीं शिवरीनारायण के साथ राजिम और तुरतुरिया में भी काम जारी है।

    पहले चरण में ये आठ स्थल होंगे विकसित

    कोरिया जिले में है। राम के वनवास काल का पहला पड़ाव यही माना जाता है। नदी के किनारे स्थित यह स्थित है जहां गुफाओं में 17 कक्ष हैं। इसे सीता की रसोई के नाम से भी जाना जाता है।

    राम वन गमन पथ के प्रथम चरण के लिए नौ स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें सीतामढ़ी-हरचौका कोरिया रामगढ़ अंबिकापुर शिवरी नारायण जांजगीर-चांपा तुरतुरिया बलौदाबाजार चंदखुरी रायपुर राजिम गरियाबंद सिहावा साऋषि आश्रम धमतरी जगदलपुर बस्तर और रामाराम सुकमा शामिल हैं।

    रामगढ़ की पहाड़ी

    सरगुजा जिले में रामगढ़ की पहाड़ी में तीन कक्षों वाली सीताबेंगरा गुफा है। देश की सबसे पुरानी नाट्यशाला कहा जाता है। कहा जाता है वनवास काल में राम यहां पहुंचे थे यह सीता का कमरा था। कालीदास ने मेघदूतम की रचना यहीं की थी।

    शिवरीनारायण

    जांजगीर चांपा जिले के इस स्थान पर रुककर भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे। यहां जोक महानदी और शिवनाथ नदी का संगम है। यहां नर-नारायण और शबरी का मंदिर भी है। मंदिर के पास एक ऐसा वट वृक्ष है जिसके दोने के आकार में पत्ते हैं।

    तुरतुरिया

    बलौदाबाजार भाटापारा जिले के इस स्थान को लेकर जनश्रुति है कि महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यहीं था। तुरतुरिया ही लव-कुश की जन्मस्थली थी। बलभद्री नाले का पानी चट्टानों के बीच से निकलता है, इसलिए तुरतुर की ध्वनि निकलती है जिससे तुरतुरिया नाम पड़ा।

    चंदखुरी

    रायपुर जिले के 126 तालाब वाले इस गांव में जलसेन तालाब के बीच में भगवान राम की माता कौशल्या का मंदिर है। कौशल्या माता का दुनिया में यह एकमात्र मंदिर है। चंदखुरी को माता कौशल्या की जन्मस्थली कहा जाता है, इसलिए यह राम का ननिहाल कहलाता है।

    राजिम

    गरियाबंद जिले का यह प्रयाग कहा जाता है, जहां सोंढुर पैरी और महानदी का संगम है। कहा जाता है कि वनवास काल में राम ने इस स्थान पर अपने कुलदेवता महादेव की पूजा की थी, इसलिए यहां कुलेश्वर महाराज का मंदिर है। यहां मेला भी लगता है।

    सिहावा

    धमतरी जिले के सिहावा की विभिन्न् पहाड़ियों में मुचकुंद आश्रम अगस्त्य आश्रम अंगिरा आश्रम श्रृंगि ऋषि कंकर ऋषि आश्रम शरभंग ऋषि आश्रम एवं गौतम ऋषि आश्रम आदि ऋषियों का आश्रम है। राम ने दण्डकारण्य के आश्रम में ऋषियों से भेंट कर कुछ समय व्यतीत किया था।

    जगदलपुर

    बस्तर जिले का यह मुख्यालय है। चारों ओर वन से घिरा हुआ है। यह कहा जाता है कि वनवास काल में राम जगदलपुर क्षेत्र से गुजरे थे क्योंकि यहां से चित्रकोट का रास्ता जाता है। जगदलपुर को पाण्डुओं के वंशज काकतिया राजा ने अपनी अंतिम राजधानी बनाई थी।

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    दूसरे चरण के बाद इनका होगा विकास

    • कोरिया – सीतामढ़ी घाघरा कोटाडोल सीमामढ़ी छतौड़ा सिद्ध बाबा आश्रम देवसील रामगढ़ (सोनहट अमृतधारा
    • सरगुजा – देवगढ़ महेशपुर बंदरकोट (अंबिकापुर से दरिमा मार्ग मैनपाट मंगरेलगढ़ पम्पापुर
    • जशपुर-किलकिला (बिलद्वार गुफा सारासोर रकसगण्डा
    • जांजगीर चांपा-चंद्रपुर खरौद जांजगीर
    • बिलासपुरमल्हार
    • बलौदाबाजार भाटापारा धमनी पलारी नारायणपुर कसडोल
    • महासमुंद-सिरपुर
    • रायपुर-आरंग चंपारण्य
    • गरियाबंद-फिंगेश्वर
    • धमतरी – मधुबन (राकाडीह अतरमरा (अतरपुर सीतानदी
    • कांकेरकांकेर (कंक ऋषि आश्रम
    • कोंडागांव – गढ़धनोरा केशकाल जटायुशीला फरसगांव
    • नारायणपुर नारायणपुर रक्सा डोंगरी छोटे डोंगर
    • दंतेवाड़ा बारसूर दंतेवाड़ा गीदम
    • बस्तर- चित्रकोट नारायणपाल तीरथगढ़
    • सुकमा – रामाराम इंजरम कोंटा

    पर्यटन सचिव पी.अनबलगन ने इसे लेकर बुधवार को प्रेजेंटेशन दिया। 137 करोड़ 75 लाख रुपये की कुल लागत वाले इस प्रोजेक्ट में अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह से काम शुरु हो जाएगा। इसकी शुरुआत रायपुर के पास चंदखुरी के माता कौशल्या मंदिर से होगी। लगभग 1400 किलोमीटर सड़कों के दोनों ओर वृक्षारोपण होगा। राम वन गमन पथ पर पहले चरण में 9 स्थानों का चयन किया गया है। सभी जगहों पर लैंड स्केपिंग प्री-कास्ट और फेब्रीकेशन वर्क, गेट पर भगवान राम का धनुष तीर होगा। राम के झंडे लगेंगे, प्राचीन लुक के लैंपोस्ट होंगे

    शिविरीनरायण ब्रिज के ऊपर लेजर लाइट शो का इंतजाम भी होगा। धमतरी जिले में सप्तऋषि आश्रम का सौंदर्यीकरण किया जाना है। नगरी को पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। बायोडायवर्सिटी पार्क बनेंगे। जिन 9 जगहों को डेवलप किया जा रहा है उनमें उनमें सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) शामिल हैं।

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