Monday, November 28, 2022
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    छत्तीसगढ़ की दस मशहूर जगहें – Top 10 Tourist Places in Chhattisgarh

    Top 10 Tourist Places in Chhattisgarh – छत्तीसगढ़ मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है जिसकी राजधानी रायपुर है। छत्तीसगढ़ राज्य अपनी विशाल वन क्षेत्र, खनिज सम्पदा, खूबसूरत घाटी, झरनों और नदियों के लिए जानी जाती है। छत्तीसगढ़ में धान की पैदावार अन्य राज्यों की तुलना में अधिक होने के कारण छत्तीसगढ़ राज्य को धान का कटोरा कहा जाता है। अगर छत्तीसगढ़ के इतिहास की बात की जाये तो इसका जिक्र महाभारत और रामायण की महागाथाओं में मिलता है। प्राचीन समय की बात करें तो छत्तीसगढ़ राज्य को दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था। छत्तीसगढ़ राज्य अपनी कला-संस्कृति और धार्मिक महत्वों के कारण पूरे देश-विदेश में एक अलग ही पहचान बनाया हुआ है। यहाँ की विविध वन्य क्षेत्र और पहाड़ी श्रृंखलाओं की सौंदर्य इतनी है कि यह किसी जन्नत से कम नहीं लगते जो पर्यटकों को काफी आकर्षित करते है।

    छत्तीसगढ़ के वनों में विभिन्न प्रकार के जड़ी-बूटी पायी जाती जिस वजह से छत्तीसगढ़ को हर्बल स्टेट भी कहा जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य के लोग मेहमान नवाज़ी में कोई कसर नहीं छोड़ते। यह राज्य अपनी आदिवासी जीवन शैली और कला संस्कृति को आज भी समेटा हुआ है जहाँ आज भी यहाँ मांदर की थाप गूंजती है। साथ ही साथ छत्तीसगढ़ राज्य का पर्यटन लोगों को बहुत आकर्षित करता है यहाँ कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल, प्राचीन धार्मिक स्थल, गुफाएँ, छोटे-बड़े वॉटरफॉल, वन्य अभ्यारण, फन पार्क और घूमने की जगह है जिसे देखने देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पर्यटक आते हैं।

    1. छत्तीसगढ़ का सबसे बेस्ट टूरिस्ट प्लेस चित्रकोट जलप्रपात

    छत्तीसगढ़ के जगदलपुर सिटी से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चित्रकोट जलप्रपात की प्रसिद्धि पुरे देश-विदेश तक है। हर साल छत्तीसगढ़ की इस खुबसूरत वॉटरफॉल को देखने देश-विदेश से काफी पर्यटक आते है। अगर छत्तीसगढ़ की टॉप 10 सबसे प्रसिद्ध टूरिस्ट प्लेस की बात की जाये तो छत्तीसगढ़ का यह चित्रकोट जलप्रपात उनमे से एक है। चित्रकोट वॉटरफॉल की खास बात यह है कि करीब 90 फ़ीट की ऊँचाई और 300 मीटर चौड़ा होने के कारण यह अद्भुत जलप्रपात छत्तीसगढ़ का नहीं बल्कि भारत का सबसे अधिक चौड़ाई वाला जलप्रपात है और इसकी आकृति घोड़े के नाल के सामान होने की वजह से इस वॉटरफॉल की तुलना अमेरिका के नाइग्रा फॉल के साथ की जाती है इसलिए इस जलप्रपात को भारत की मिनी नाइग्रा फॉल भी कहा जाता है।

    चित्रकोट वॉटरफॉल की खूबसूरती इतनी है कि उसे देख आपकी ऑंखें टस से मस न होगी क्योकि यह वॉटरफॉल किसी के भी मन को मोह लेने में कोई कसर नहीं छोड़ती। यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ का मोस्ट एडवेंचर पिकनिक स्पॉट है इसलिए यहाँ हमेशा भीड़ देखने को मिलती है। इसके अलावा यहाँ मोटरबाइक पैराग्लाइडिंग, नेचर ट्रेल ट्रैकिंग और कैंपिंग जैसी एडवेंचर एक्टिविटीज का लुफ्त उठा सकते है। यहाँ बेहतरीन वुडेन रिसोर्ट की भी है जिनमे ठहर कर आप यहाँ फैली खूबसूरत हरियाली का आनंद ले सकते है। चित्रकोट वाटरफॉल को देखने का सबसे सहीं समय जुलाई से अक्टूबर के बीच का होता है।

    2. छत्तीसगढ़ में घूमने की जगह गंगरेल डैम

    गंगरेल डैम

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर धमतरी जिले के महानदी पर बना गंगरेल डैम छत्तीसगढ़ की टॉप टूरिस्ट प्लेस (Top 10 Tourist Places in Chhattisgarh) में से एक है जिसे रवि शंकर सागर बांध के नाम से जाना जाता है। इस गंगरेल डैम का निर्माण 1978 में किया गया था। महानदी पर बना यह खूबसूरत डैम अपने अंदर अताह जल राशि सामने के साथ छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे लम्बा डैम है जिसकी खूबसूरती को देखने देश विदेश से पर्यटक यहाँ दस्तक देते है। यह डैम देखने में इतना विशाल है कि विभिन्न द्वीपों से घिरा समुंद्र का एहसास दिलाता है। वर्तमान में गंगरेल डैम की प्रसिद्धि पर्यटकों के बीच इसलिए बढ़ी क्योकि यहाँ करीब 1 किलोमीटर लम्बी आर्टिफीसियल बीच का निर्माण किया गया है जो देखने में एक असली समुद्री बीच के भली भांति दिखाई पड़ता है। इस बीच को इस प्रकार से तैयार किया गया कि आप इस बीच में आप से विभिन्न वाटर एक्टिविटीज़ का आनंद ले पाएंगे जो इस जगह की आकर्षण का केंद्र है। इस कारण गंगरेल डैम को छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा भी कहा जाता है।

    3. छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध दार्शनिक स्थल भोरमदेव टेम्पल

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 125 किमी और कबीरधाम से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर चौरागाँव के हरी भरी घाटियों के बीच स्थित भोरमदेव देव मंदिर है। लगभग हज़ार साल पुराना भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध दार्शनिक स्थलों में से एक है। इस मंदिर को देखने देश-विदेश से पर्यटक हर साल यहाँ आते है। इस मंदिर का निर्माण भड़िगनागवंशी राजाओं के काल में 7वी से 12वी शताब्दी के बीच करवाया गया था। ऐसी मान्यता है कि गोड़ राजाओं के देवता भोरमदेव थे जो भगवान शिव जी का ही एक नाम है। इस कारण इस मंदिर का नाम भोरमदेव पड़ा। भोरमदेव मंदिर की खास बात यहाँ है कि नागर शैली में निर्मित इस मंदिर के बाहरी दीवारों में कामुक प्रतिमाएँ, गज,अश्व, नृतक-नृतिकाएँ, देवी-देवताओं की खुबसूरत नक्काशी देखने को मिलती है।

    भोरमदेव मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहा जाता है क्योकि इसकी छवि म.प्र. के छत्तरपुर जिले में स्थित खजुराहो मंदिर और ओड़िसा के कोणार्क सूर्य मंदिर के सामान है। भगवान शिव को समर्पित भोरमदेव मंदिर की वास्तुकला और खूबसूरत नक्काशी की प्रसिद्धि देश के कोने-कोने में है। इस जगह राज्य सरकार द्वारा मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रैल के पहले सप्ताह तक भोरमदेव महोत्सव का आयोजन कराया जाता है जिसमे काफी भीड़ देखने को मिलती है। भोरमदेव मंदिर के परिसर में स्थित और भी प्राचीन मंदिर है जिनके आप दर्शन कर सकते है। इसके आलावा यहाँ पुरातात्विक संग्रहालय भी है जहाँ आप 1000 साल पुरानी मूर्तियों को देख पाएंगे।

    4. छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुटुमसर गुफा

    कुटुमसर गुफा

    छत्तीसगढ़ की धरती में आपको ऐसे कई हैरत अंगेज कर देने वाली जगह देखने को मिलेंगी जिसे देख आप वाकिये में आश्चर्य चकित हो जायेंगे। उनमे से एक बस्तर जिले के जगदलपुर शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर पर कुटुमसर की गुफा है। यह कुटुमसर गुफा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में से एक है जो कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलो के बीच कांगेर लाइमस्टोन बेल्ट में स्थित है। यह गुफा ब्रिटिस काल में लोगो के बीच अस्तित्व में आया। कुटुमसर गुफा की खास बात यह है कि प्रकृति से निर्मित यह गुफा भारत की सबसे लम्बी गुफा में से एक है। यह रहस्यमयी गुफा लगभग 200 मीटर लम्बी है और 35 मीटर गहरी है। इसी वजह से यहाँ ऑक्सीजन की कमी को महसूस किया जा सकता है।

    5. छत्तीसगढ़ का फेमस टूरिस्ट प्लेस जतमई घटारानी मंदिर

    रायपुर से लगभग 85km दूर गरियाबंद जिले के खूबसूरत घने जंगल में स्थित जतमई घटारानी मंदिर छत्तीसगढ़ की प्रमुख पर्यटन स्थल में से एक है। जतमई मंदिर और घटारानी मंदिर दोनों अलग-अलग मंदिर है दोनों की बीच की दूरी लगभग 25km है जहाँ हर साल हज़ारो पर्यटकों की भीड़ देखने को मिलती है। यह दोनों जगह अपने अविश्वसनीय प्राकृतिक सौन्दर्य और धार्मिक महत्वों की वजह से पूरे छत्तीसगढ़ की टॉप फेमस प्लेसस में जाना जाता है। जतमई मंदिर और घटारानी मंदिर की बनावट देख आप उसकी खूबसूरती में खो से जायेंगे। चट्टानों के ऊपर बनी यह दोनों मंदिर बेहरीन कारीगिरी का उदाहरण है। बरसात के मौसम में यहाँ का नज़ारा कुछ अलग ही होता है। जतमई घटारानी मंदिर अपने धार्मिक महत्वों के साथ-साथ एडवेंचर पसंदीदा लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। यहाँ बरसात के मौसम में बहुत ही खूबसूरत वॉटरफॉल का निर्माण होता है। जतमई और घटारानी वॉटरफॉल छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध वॉटरफॉल में से एक है। बरसात के समय इन वॉटरफॉल में काफी पर्यटक नहाते और मौज-मस्ती करते दिखाई देते है। 

    6. छत्तीसगढ़ का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल इंदिरावती राष्ट्रीय उद्यान

    राष्ट्रीय उद्यान

    छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंदिरावती राष्ट्रीय उद्यान छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध नेशनल पार्क है। यह नेशनल पार्क अपने विविध वनस्पति, जंगली जानवर और पक्षियों की विभिन्न प्रजाति इत्यादि के लिए जाना जाता है जिसमे बाघ, जंगली भैसों का झुण्ड, तेंदुआ, भालू, गीदड़, जंगली सूअर, चीतल आदि कई जंगली जानवर शामिल है। साथ ही साथ पहाड़ी मैना, चील, वुड पिजन के अलावा पक्षियों के कई प्रजातियाँ देखने को मिलते है। इंदिरावती नेशनल पार्क का नाम यहाँ बहने वाली नदी इंदिरावती के नाम पर रखा गया है। यह पूरा राष्ट्रीय उद्यान 2799.08 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।

    7. गिरौदपुरी जैतखाम छत्तीसगढ़ पर्यटन स्थल

    महानदी और जोंक नदियों के संगम पर बलौदाबाजार से 40 किमी और बिलासपुर से 80 किमी दूर गिरौदपुरी धाम स्थित है यह छत्तीसगढ़ का सबसे पूजनीय तीर्थ स्थल है। यह गिरौधपुरी जैतखाम सतनामी समुदाय के लोगों के लिए सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। यहां पूरे साल भक्तों का आना जारी रहता है लेकिन फागुन पंचमी में हर साल तीन दिवसीय मेले के दौरान लाखो की संख्या में लोग गिरौधपुरी आते हैं।

    जैतखाम शांति, एकता और भाईचारे का प्रतीक है गिरौदपुरी में जो जैतखाम बनाया गया यह सामान्यतौर पर जो जैतखाम बनाया जाता है उससे बिलकुल अलग है यह बहुत भव्य है साथ ही इसे बनाने के लिए आधुनिक तकनीको का इस्तेमाल किया गया है गिरौधपुरी जैतखाम की ऊँचाई दिल्ली के कुतुब मीनार से भी अधिक है, इसकी ऊंचाई 77 मीटर (243 फीट) है, जबकि कुतुब मीनार 72.5 मीटर (237 फीट) ऊंची है. सीढ़ियों से ऊपर और नीचे जाने के लिए एक स्पायरल सीढ़ी भी बनाई गई है। इसके अलावा, लिफ्टों को विशेष रूप से बुजुर्गों, विकलांगों, बच्चों और महिलाओं के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    यह स्तंभ कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगता है। इस सफेद स्तंभ की वास्तुकला इतनी शानदार है कि लोगों की आँखें चकरा जाती हैं। यह वायुदाब और भूकंप प्रतिरोधी है और आसमानी बिजली से और आग से बचाव के लिए उच्च तकनीकी प्रावधान भी किए गए हैं।  इसके अलावा इसमें सात बालकनियाँ भी बनाई गई हैं, जहाँ आगंतुक अपने आस-पास के खूबसूरत प्राकृतिक परिदृश्य को देख पाएंगे।

    8. लक्ष्मण मंदिर सिरपुर

    लक्ष्मण मंदि

    सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर का निर्माण सन् 525 से 540 के बीच हुआ। सिरपुर (श्रीपुर) में शैव राजाओं का शासन हुआ करता था। इन्हीं शैव राजाओं में एक थे सोमवंशी राजा हर्षगुप्त। हर्षगुप्त की पत्नी रानी वासटादेवी, वैष्णव संप्रदाय से संबंध रखती थीं, जो मगध नरेश सूर्यवर्मा की बेटी थीं। राजा हर्षगुप्त की मृत्यु के बाद ही रानी ने उनकी याद में इस मंदिर का निर्माण कराया था। यही कारण है कि लक्ष्मण मंदिर को एक हिन्दू मंदिर के साथ नारी के मौन प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

    नागर शैली में बनाया गया यह मंदिर भारत का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जिसका निर्माण लाल ईंटों से हुआ था। लक्ष्मण मंदिर की विशेषता है कि इस मंदिर में ईंटों पर नक्काशी करके कलाकृतियाँ निर्मित की गई हैं, जो अत्यंत सुन्दर हैं क्योंकि अक्सर पत्थर पर ही ऐसी सुन्दर नक्काशी की जाती है। गर्भगृह, अंतराल और मंडप, मंदिर की संरचना के मुख्य अंग हैं। साथ ही मंदिर का तोरण भी उसकी प्रमुख विशेषता है।

    9. छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे विशाल चर्च

    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे विशाल चर्च है. इस चर्च की नींव वर्ष 1962 में रखी गई. जब इस चर्च को बनाया गया था, उस समय कुनकुरी धर्मप्रांत के बिशप स्टानिस्लास लकड़ा थे. इस विशालकाय चर्च वाले भवन को एक ही बीम के सहारे खड़ा करने के लिए नींव को विशेष रूप से डिजाइन किया गया था, और सिर्फ इसी काम मे दो साल लग गए. नींव तैयार होने के बाद भवन का निर्माण 13 सालों में पूरा हुआ. कहा जाता है कि उस वक्त ये चर्च जंगल और पहाड़ियों से घिरा हुआ था, लेकिन समय के साथ सब बदलता गया. अब जिस जगह पर चर्च है, वह क्षेत्र शहर के रूप में विकसित हो चुका है.

    10.जंगल सफारी

    जंगल सफारी

    जंगल सफारी, सेक्टर -39 नया रायपुर में स्थित है | नया रायपुर,रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किमी और स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर से 15 किमी दूर है। नंदनवन जंगल सफारी का पूरा 800 एकड़ क्षेत्र सुंदर इलाकों के साथ हरे भरे हरे रंग का है। कई स्वदेशी पौधों की प्रजातियां भी वनस्पति को जोड़ती हैं, जो जानवरों के लिए प्राकृतिक आवास बनाते हैं। इसमें 130 एकड़ का ‘खांडवा जलाशय’ नामक जल निकाय है , जो कई प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है। चार सफारी अर्थात् शाकाहारी, भालू, बाघ और शेर की योजना बनाई गई है। आने वाले चिड़ियाघर में 32 और प्रजातियां प्रदर्शित की जाएंगी।

    सफारी क्षेत्र में, अब तक चार सफारी बनाए गए हैं;

    शाकाहारी वन्यप्राणी सफ़ारी – क्षेत्र 30 हेक्टेयर

    भालू सफारी – क्षेत्र 20 हेक्टेयर

    टाइगर सफारी – क्षेत्र 20 हेक्टेयर

    शेर सफारी – क्षेत्र 20 हेक्टेयर

    सफारी का पूरा क्षेत्र 5 मीटर की ऊंचाई के चेन लिंक बाड़ द्वारा कवर किया गया है।जो 1.5 मीटर और 60 डिग्री पर शीर्ष पर झुके हुए है । क्षेत्र में पर्याप्त वनस्पति, आश्रय और जल निकाय हैं। सफारी और सेवा सड़क के साथ ग्रीन बेल्ट बनाया गया है और 55000 पौधों को सफ़ारी के अंदर रहवास में सुधार के लिए लगाया गया है।

    वहां बाड़े के माध्यम से जाया जाएगा जिसमें प्रवेश और निकास डबल द्वार की व्यवस्था के माध्यम से होगा और आगंतुक वाहन निर्दिष्ट सड़क पर कम गति पर सफारी के भीतर चलेगा।

    ये 4 सफारी अर्थात् टाइगर सफ़ारी, शाकाहारी वन्यप्राणी सफ़ारी, शेर सफारी और भालू सफारी सभी आगंतुकों के लिए तैयार हैं। वर्तमान में टाइगर सफारी में 3 बाघ रखे गए हैं, 80 हर्बिवोर को हर्बिवोर सफ़ारी में रखा गया है जिसमें चीतल, सांभर, ब्लू बुल, बार्किंग डीयर, और ब्लैक बक शामिल हैं। भालू सफारी में वर्तमान में 4 भालू हैं।

    आशा करते है कि आपको ये आर्टिकल पढ़ के अच्छा लगा होगा। छत्तीसगढ़ में इसके 10 मशहूर जगहों (Top 10 Tourist Places in Chhattisgarh) के अलावा भी और भी जगह जो बहुत ही प्रसिद्ध है। आगे हम इसके बारे में बात करेंगे।

    Also Read: छत्तीसगढ़ ही नहीं भारत का पहला हॉलीवुड हीरो था “टाइगर बॉय” चेंदरू

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